The Buddha and his Dhamma Post 101 to 110
पोस्ट 101 सर्व संस्कार अनित्य हैं ऐसा मानना ही धम्म है 1) अनित्यता के सिद्धांत के तीन पहलू हैं। 2) अनेक तत्वों से मिलकर बनी वस्तुएँ अनित्य हैं। 3) व्यक्तिगत रूप में प्राणी अनित्य है। 4) प्रतीत्यसमुत्पन्न वस्तुओं का आत्मतत्व अनित्य है। 5) अनेक तत्वों से मिलकर बनी वस्तुओं की अनित्यता को बौद्ध आचार्य असंग ने अच्छी तरह स्पष्ट किया है। 6) असंग कहते हैं - सभी वस्तुएँ हेतु और प्रत्यय के कारण उत्पन्न होती हैं। उनका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता। हेतु-प्रत्ययों का उच्छेद हो जाने पर वस्तुओं का अस्तित्व नहीं रहता। 7) सजीव प्राणियों का शरीर पृथ्वी, आप, तेज और वायु - इन चार महाभूतों का परिणाम है। और इन चार भूतों का पृथक्करण हो जाने पर यह प्राणी प्राणी के रूप में नहीं रहता। 8) "अनेक तत्वों से मिलकर बनी वस्तु अनित्य है" - इस वचन का अभिप्राय उपरोक्त प्रकार का है। 9) सजीव प्राणियों की अनित्यता का वर्णन "वह नहीं है, वह नहीं होता" - इन शब्दों में किया जा सकता है। 10) इस अर्थ में देखा जाए तो जो प्राणी भूतकाल में जीवन व्यतीत कर रहा था, वही प्राणी वर्तमानकाल में नहीं र...