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मैत्री अंत करण की स्वतंत्रता

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  मैत्री सिर्फ दोस्तों के साथ बैठने या हँसी-मजाक, खान-पान करना अपना समय एक-दूसरे के साथ बिताना यही मैत्री का अर्थ लेकर चलते है।  मैत्री तो दुराचारी अनैतिक लोग जिसमें कुसंगति,अभिमानी,जुआरी, व्यभिचारी, शराबी, धोखेबाज़, रिश्वतखोर और हिंसक ऐसे स्वभाव के व्यक्तियों की भी मैत्री होती है इस तरह की नकारात्मक मैत्री से बेहतर है कि सदाचारी व्यक्ति एकांत में रहो, पर सच्चाई का साथ न छोडे। मूर्ख की संगति से दूर रहे; जैसे जंगल में हिरण अकेला फिरता है, वैसे ही आत्मनिर्भर बने। सच्ची और व्यापार मैत्री बौद्ध धम्म के अनुसार सिर्फ भावना नहीं, वो धम्म की ज्वाला है। पुण्यकर्म भी उतना मूल्य नहीं रखते जितना मैत्री का एक अंश! मैत्री, अंतःकरण की स्वतंत्रता है। वह सब पुण्यकर्मों को अपने में समेट लेती है, प्रकाशित होती है, प्रज्वलित होती है। मैत्री की व्यापकता सम्पूर्ण प्राणिजगत संपूर्ण जीवमात्र के प्रति करुणा और बंधुभाव। यह केवल मित्रों के लिए नहीं, बल्कि शत्रु के लिए भी उतना ही प्रेमभाव यह भाव केवल मित्रों के लिए नहीं, शत्रुओं के लिए भी हो, यही सच्ची मानवता है। अगर कभी अपमान हो तो उसका उत्त...

अधिवक्ताओं ने डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम के प्रति भारी आलोचना क्यों की?

डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर समाज को जाति, असमानता और पुरुष प्रधानता से मुक्त करना चाहते थे। उन्होंने कानून के माध्यम से महिलाओं और दलितों के अधिकारों की रक्षा की और हिंदू समाज को आधुनिक, न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने का प्रयास किया। डॉ. अंबेडकर को हिंदू विवाह अधिनियम,1955 की क्रांतिकारी धारा 13 पेश करने के लिए पारंपरिक अधिवक्ताओं की भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। यह धारा तलाक की डिक्री प्रदान करती है, जो वैदिक शास्त्रों, स्मृतियों और धार्मिक सिद्धांतों के विरुद्ध थी। वैदिक समारोहों में केवल विवाह के लिए मंत्र होते हैं, तलाक के लिए नहीं, एक बार विवाह हो जाने पर, यह जीवन भर बना रहता है। डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर का मुख्य उद्देश्य पुरुष और महिला को एक सुखी दूसरा वैवाहिक जीवन प्रदान करना था, ताकि वे पहले पति या पत्नी से अलग होकर भी एक मजबूत समाज का निर्माण कर सकें। इस धारा ने दोनों पक्षों को तलाक की डिक्री प्राप्त करने की सुविधा प्रदान की, यदि वे सौहार्दपूर्ण ढंग से एक साथ रहने के लिए खुद को समायोजित करने में विफल रहे। डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर ने पूर्व पतियों द्वारा भरण-पोषण के लिए तलाकशुदा महिलाओं की भी द...