युवाओं के लिए हमारा संकल्प

समाज में हमनें बुद्ध विहारों का तो निर्माण कराया लेकिन अधिकांश विहारों में केवल आठ दस वृद्ध महिलाओं और चार पांच वृद्ध पुरुष दिखाई देते हैं कुछ एक विहारों में बड़े पैमाने पर समाज नियमित रूप से धम्म संस्कृति के अनुसार कार्य करते होंगे जो अपवाद है। कुछ विहार ताला लगाकर बंद होता है।
      समाज के जागरुक लोगों का कर्तव्य है कि समाज में निर्माण हुए इस ग्लानि को इस समाजिक समस्या को कैसे दूर करें? एक पिढी का निर्माण होने में तिस वर्ष लगते हैं आज हमनें संस्कार देने शुरू किए तो आनेवाली पीढ़ी जरूर अपने संस्कृति के प्रति जागरूक होगी।
राष्ट्रीय पिता जोतिबा फुले शेगांव रहटगांव अभ्यासिका अमरावती में आठ वर्ष पूर्व युवाओं को धम्म,समाज और संस्कृति में दिलचस्पी निर्माण होने के लिए अभ्यासिका में बहुजन महापुरुषों का जयंती स्मृति दिवस का आयोजन करना आषाढ़ पूर्णिमा से तिन मांस के लिए वर्षावन का आयोजन करना धम्म संस्कृति को संजोकर रखने के प्रयास हेतु राष्ट्रपिता जोतिबा फुले शेगांव रहटगांव अभ्यासिका के छात्र आषाढ़ पूर्णिमा से वर्षावास को शुरू करते हैं यह उपक्रम हर वर्ष अभ्यासिका के युवाओं द्वारा आयोजित किया जाता है यह युवाओंके लिए पाठ्यक्रम का एक हिस्सा होता है। अभ्यासिका में सुबह की शुरुआत 10:00 बजे बुद्ध वंदना, बाईस प्रतीज्ञा और हर दिन "बुद्ध और उनका धम्म" यह 
ग्रंथ पढ़ा जाता है जो आश्विन पूर्णिमा तक यह पुर्ण किया जाता साथ साथ आकलन किया जाता है और निरंतर आचरण करने का प्रयास किया जाता है। वर्षावास यह धम्म और धम्म संस्कृति को सिखने कि प्रक्रिया है इस ज्ञान का कभी समापन नहीं हो सकता यह धम्म सिखना सिखाना यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो धम्म चक्र,धम्म क्रांति को गतीमान करने की प्रक्रिया है।
       इस अभ्यास उपक्रम के माध्यम से अभ्यासिका के युवक प्रतीयोगीता परिक्षा के साथ साथ नैतिक समाज के निर्माण की प्रक्रिया जो धम्म का ज्ञान आत्मसात कर रहे हैं जिसका परिणाम धम्म के प्रचारक,प्रसारक और अभ्यासक का निर्माण करने में मदद हो रही है। हमारे द्वारा युवाओं को सम्यक ध्येय और उद्देश्य उनके आगे रखना जरूरी है जिसका सकारात्मक परिणाम समाज को जरूर मिलेगा। हम सबने मिलकर समाज के युवाओं के बीच उचित संस्कार, धम्म संस्कृति और धर्म आचरण वाले समाज के निर्माण के लिए उपरोक्त कार्यक्रम को लागू करने का प्रयास विहारों और अभ्यासिका में करना चाहिए।

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