लायक कार्यकर्ता कौन है❓

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      समाजीक और धम्म कार्य करने वाले अनुयायी कार्यकर्ता जो शहरों में रहकर भी गांव देहातों मे रहनेवाले लोगों के लिए कार्य करते है वह लोग धन्य है पुजनीय है। पर जो अधिकतर लोग बरसाती मेंढक समान केवल साल मे एक या दो बार अपने स्वार्थ के लिए मनोरंजनात्मक कार्यक्रम के माध्यम से कार्य करने का दिखावा करते हैं और उसे समाजीक और धम्म कार्य समझते है ऐसे कार्य को ही योग्य कार्य को परीभाषीत करते है वह सही मायने में कार्य नहीं हो सकता क्यों की डाँ.बाबासाहब आंबेडकर ने 18 मार्च 1956 के आग्रा के भाषण मे इस बात को योग परिभाषित किया है।
       आयेदिन देखने में आता है के समाज का कार्यकर्ता वर्ग जो साल मे एक या दो बार कार्यक्रम जो समाजीक घटकों द्वारा पैसा जमा कर या किसी राजनैतिक व्यक्ति द्वारा रुपिया पैसा लेकर अपना स्वभिमान बेचकर कार्यक्रम के नाम पर खुद को फोकस करते है पर वह लोग कभी भी गांव देहातों मे जाकर कार्य करने कि बजाय केवल शहरों में साल मे एक या दो बार कार्यरत रहते हैं पर उन्हें ग्राम देहातों मे कार्य करने मे परहेज होती है क्योंकि शहरों मे  सुनने वाले श्रोता गण होता है। कुर्सी,डायस,माईक, प्रसिद्धि चकाचौंध करने वाले मनोरंजन के कार्यक्रम जिसमें नाच, गाना होता हैं और इस प्रकार के कार्यों को ही समाजीक और धम्म कार्य कहलाया जाता है। इस तरह की सारी बातें शहरों में मौजूद होती हैं और इस तरह का नेतृत्व करने वालों की संख्या शहरों मे बडे पैमाने पर कार्यरत है। लेकिन इनमें इमानदारी से कार्य करने वाले कुछ गिने चुने और ईमानदार लोग भी निरंतरता से कार्यरत हैं।
      शहरों मे समाजीक कार्य करने का दिखावा करने वालों का खास वैशिष्ट्य यह होता है कि, इस तरह के कार्यकर्ता सालभर कोईभी रोजगार और कामकाज नहीं करते है लेकिन उनका परिवार सभी सुख सुविधाओं से परिपूर्ण होता है। घर मे हर सुख सुविधा कि हर वस्तु याहांँ तक फोरव्हीलर, टुव्हिलर,ऐ.सी सारी सुख सुविधाएं होती है एक सवाल पैदा होता है कि घर परिवार चलाने के लिए और इन सारी चिजों को मेंटेनेंस करने के लिए रुपीया पैसा काहाँ से आता है? इसका जवाब आपको पता हो तो जरूर बताना। आगे इस तरह के लोग बडे शौक के साथ हर चुनाव में अपनी मौजूदगी का प्रयास करते हैं और समाज को बेचते भी है।
परंतु इसके विपरित जो लोग अपने आय का कुछ हिस्सा समाज के भलाई पर खर्च करते हैं गांव देहातो मे जाकर कार्य करने में अधिक महत्व देते हैं। वे अकेले कार्य करने के बदले वे टिम वर्क के माध्यम से कार्य करते हैं जो टीम समाजीक तथा धम्म कार्य को निरंतरता से ग्राऊंड झिरो पर कार्य करते हैं रुपिया पैस बरबाद करने के बजाय सामाजिक परिणाम पर अधिक कार्य करते है ऐसा कार्य ही सही मायने में परिणाम देने वाला कार्य होता है।
     सकारात्मक नेतृत्व जिसे सामाजिक और धम्म का ज्ञान होने से समाज के हर घटकों को माला के समान एक धागे में पिरोकर रखने का कौशल्या होता है। जो टीम में कार्यरत उस हर व्यक्ति मे सामाजिक नेतृत्व निर्माण करने कि क्षमता का विकास करना जरुरी है जिनमें मैत्री,ज्ञान,प्रज्ञा,करुणा इन सद्गुणों को विकसित कर नेतृत्व को और निखारा जा सकता है। इसका परिणाम नेतृत्व करने वाले हर व्यक्ति द्वारा समाज के हर घटकों मे जो अज्ञान का अंधकार है उसे मैत्री,ज्ञान,प्रज्ञा,करुणा इन सद्गुणों के माध्यम से दुर किया जाता है। इन गुणों से विरहीत समाज में जो नेतृत्व कार्यरत्त होता है वह अज्ञानता पुर्ण कृती करता है जिसे वह परीपूर्ण कार्य समझता है जिससे अधुरे ज्ञान के कारण समाजीक हानी होती है।

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