कार्यकर्ताओं अनुयायियों हमारे मरने से पहले!

कार्यकर्ताओं अनुयायियों हमारे मरने से पहले!
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        सांसारिक अनिश्चितता और जीवन में निरंतर परिवर्तन के कारण, यह निश्चित रूप से कहना असंभव है कि जीवन में कब क्या होगा! आज हम उत्साहीत हैं लेकिन कल हम दुखी होंगे। इसलिए, जब हम उत्साहीत होते है तब यथासंभव सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। जो व्यक्ती मिशन कार्य के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं और रचनात्मक कार्यों में पहल करते हैं उनमें ऐसी ऊर्जा होती है कि दस लोग के कार्य  की तुलना में उस व्यक्ति का कार्य उल्लेखनीय होता है। वे उर्जावान व्यक्ति जिनमें संवाद कौशल्य, बौद्धीक कौशल्य कृतीगत कार्य का अंमल इन वैशिष्ट्य पुर्ण गुणो के कारण वे समाज के स्मरण में रहते हैं। इस तरह के गुणों वाले कार्यकर्ता अनुयाई जब अचानक उनकी मृत्यु हो जाती है जब इस संसार को अलविदा कहते हैं मृत्यू के पश्चात भी वे लोगों के स्मरण में रहते हैं।
परंतु स्मरण में रहना और अस्तित्व का रहना दोनों अलग अलग बाते है।इससे ज्यादा भयावह चित्र याने मिशन में कार्यकर्ता के जाने से निर्माण हुए रिक्त स्थान, उस खाली जगह को भर पाना असम्भव है। कार्यकर्ता के मृत्यु को अनित्य सत्यं मानकर दुःख को भुलाकर समाज में  रिक्त हुए कार्यकर्ता अनुयाई के स्थान की ऐवज में नये कार्यकर्ता अनुयाई का निर्माण करना भी उतना ही जरूरी है। कुल मिलाकर तैयार कार्यकर्ताओं की एक सेना तैयार करना मिशन की दृष्टि से बेहद जरूरी है। प्रशिक्षित प्रचारक, प्रसारक और अभ्यासको का निर्माण करना ज़रूरी है यह कार्यकर्ता अनुयाई संगठन और मिशन को बचा सकते हैं और समाज के संकट को दूर कर सकते हैं।
         महापुरुषों की विचारधारा और जागरूकता आवश्यक है हालाँकि जागरूकता समाज की प्रगति और विकास का हिस्सा है, लेकिन केवल जागरूकता से काम नहीं चलेगा समाज में अमुलाग्र बदल,परिवर्तन के लिए जागरुकता के साथ साथ समाजिक उत्थान के लिए कुछ रचनात्मक कार्य, कार्यक्रम और प्रभावी दृश्य स्वरूप का परिणाम वाले कार्य होना आवश्यकता है। यदि समाज में कोई कार्यकर्ता या अनुयायी उपरोक्त के अनुसार कार्य कर रहा हो और उस व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु के बाद समाज को मार्गदर्शन देने के लिए कोई अन्य सक्षम व्यक्ति न बना सके तो समाज एक खंभे के तंबू की तरह ढह जाएगा। इसलिए मिशन को बढ़ाने के लिए समाज में प्रचारक,प्रसारक और अभ्यासक निर्माण करना बहुत जरूरी है और यह निर्माण प्रक्रिया हम सभी की जिम्मेदारी है, इसलिए हमें अपनी मृत्यु से पहले समाज के लिए प्रचारक, प्रचारक और अभ्यासक कार्यकर्ता तैयार करने होंगे, तभी हमारा आंदोलन सफल होगें।

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