भिमा कोरेगांव का ईतीहास केवल मात्र संयोग न होकर बहादुरी और विरता का सिलसिला दैराने वाली जिद और स्वाभीमान की अद्भुत मिसाल यह अन्या लढाई मे किये पराक्रम से सिद्ध होता है. बटालियन ने आगे भी पराक्रम दैराया... बहुतायत लोगोंको यह विजयी पराक्रम जानने की जरुरत है विजय केवल संयोग मात्र से नही होता बल्की जिद्द और साहस की विजयी दासता होती है यह कहानी इन लडाइ से भी बया कर रही है.... बटालियन का पराक्रम सन 1826 मे काठीयावाड मे,1880 मे कंधार मे भी अपना पराक्रम दिखाया.अफगान युद्ध के दौरान अग्रेजोने ईन्हे वापसी के लिये काहा, केवल 3 सैनिको ने 300 शत्रु सैनिक को मारा गिराया, उनकी स्मृती मे मुबई के युरोपियन जिमखाना रास्ते को "वॉडवी" नाम दिया गया.और अलेक्साडरा गर्ल हायस्कूल की दीवार पर उन 3 बहादुर सैनिको का नाम अंकीत है.* *भारत का गौरवशाली इतिहास1 जनवरी 1818 महार-राष्ट्र,पुणा मे भिमा नदी किनारे महार जाती के शैर्य की गाथा भिमाकोरेगाव का 75 फिट ऊंचा किर्तिस्तभ बताता है. लड़ाऊ, झुजारु, सत्य, निष्ठा एव ईमानदार जमात जानी जाता है. शिवाजी माहाराज के प्राण जिस"जिवा"ने बचाये थे वे भी ईसी जमात से थे. दूसरा बाजीराव पेशवा से युद्ध के दौरान कॉप्टन स्थेटन,"शिरुर" से दि. 31दिसंबर1817 को 20 मिल पैदल चलकर, रात 8 बजे से सुबह 9 बजे कुल 48 घंटे बिना कुछ खाये पिये महार सेना; पेशवा के पाच हजार पैदल सेना,पच्चीस हजार घुडयसवारो को माञ 500 महार सैनीकोने भिमा कोरेगाव मे, 1 जनवरी1818 को रात 9 बजे पेशवाई का अस्त कर दिया. ईसी शैर्य की गाथा को गौरवावीत करने हेतु किर्तीस्तभ ब्रिटीशोने बनाया.स्तंभ पर महावीरो के नाम अंकीत है.वे नाम है,* 1)गननाग लखनाग 2)जेटनाग धैनाग 3)हरनाग 4)गोपाल नाग बालनाग 5)रामनाग 6)देवनाग आननाग 7)गवानाग धरमनाग 8)रेनाग वाननाग 9)वपनाग हरनाग 10)गणनाग 11)विटनाग धमनाग 12)वावनाग रामनाग 13)रुपनाग लखनाग 14)कालनाग कोडनाग 15)गणनाक बालनाग 16)अंबरनाक काननाग 17)रामनाग थेरनाग 18)गोदनाग कोठेनाग 19)रामनाग थेसनाग 20)गोदनाक कोठेनाग 21)कमलनाग नाईक 22)सोमनाग *हम सब इतीहास से प्रेरित होकर नव वर्ष के अवसर पर सम्यक कार्य का संकल्प लेते है महावीरोको विनम्र अभीवादन
भिमा कोरेगांव का ईतीहास केवल मात्र संयोग न होकर बहादुरी और विरता का सिलसिला दैराने वाली जिद और स्वाभीमान की अद्भुत मिसाल यह अन्या लढाई मे किये पराक्रम से सिद्ध होता है. बटालियन ने आगे भी पराक्रम दैराया...
बहुतायत लोगोंको यह विजयी पराक्रम जानने की जरुरत है विजय केवल संयोग मात्र से नही होता बल्की जिद्द और साहस की विजयी दासता होती है यह कहानी इन लडाइ से भी बया कर रही है.... बटालियन का पराक्रम सन 1826 मे काठीयावाड मे,1880 मे कंधार मे भी अपना पराक्रम दिखाया.अफगान युद्ध के दौरान अग्रेजोने ईन्हे वापसी के लिये काहा, केवल 3 सैनिको ने 300 शत्रु सैनिक को मारा गिराया, उनकी स्मृती मे मुबई के युरोपियन जिमखाना रास्ते को "वॉडवी" नाम दिया गया.और अलेक्साडरा गर्ल हायस्कूल की दीवार पर उन 3 बहादुर सैनिको का नाम अंकीत है.
भारत का गौरवशाली इतिहास1 जनवरी 1818 महार-राष्ट्र,पुणा मे भिमा नदी किनारे महार जाती के शैर्य की गाथा भिमाकोरेगाव का 75 फिट ऊंचा किर्तिस्तभ बताता है. लड़ाऊ, झुजारु, सत्य, निष्ठा एव ईमानदार जमात जानी जाता है. शिवाजी माहाराज के प्राण जिस"जिवा"ने बचाये थे वे भी ईसी जमात से थे. दूसरा बाजीराव पेशवा से युद्ध के दौरान कॉप्टन स्थेटन,"शिरुर" से दि. 31दिसंबर1817 को 20 मिल पैदल चलकर, रात 8 बजे से सुबह 9 बजे कुल 48 घंटे बिना कुछ खाये पिये महार सेना; पेशवा के पाच हजार पैदल सेना,पच्चीस हजार घुडयसवारो को माञ 500 महार सैनीकोने भिमा कोरेगाव मे, 1 जनवरी1818 को रात 9 बजे पेशवाई का अस्त कर दिया. ईसी शैर्य की गाथा को गौरवावीत करने हेतु किर्तीस्तभ ब्रिटीशोने बनाया.स्तंभ पर महावीरो के नाम अंकीत है.वे नाम है,
1)गननाग लखनाग
2)जेटनाग धैनाग
3)हरनाग
4)गोपाल नाग बालनाग
5)रामनाग
6)देवनाग आननाग
7)गवानाग धरमनाग
8)रेनाग वाननाग
9)वपनाग हरनाग
10)गणनाग
11)विटनाग धमनाग
12)वावनाग रामनाग
13)रुपनाग लखनाग
14)कालनाग कोडनाग
15)गणनाक बालनाग
16)अंबरनाक काननाग
17)रामनाग थेरनाग
18)गोदनाग कोठेनाग
19)रामनाग थेसनाग
20)गोदनाक कोठेनाग
21)कमलनाग नाईक
22)सोमनाग
हम सब इतीहास से प्रेरित होकर नव वर्ष के अवसर पर सम्यक कार्य का संकल्प लेते है महावीरोको विनम्र अभीवादन
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