विहार जहाँ अभ्यासिका वहाँ

"विहार जहाँ अभ्यासिका वहाँ"
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*"राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका" का निशुल्क सामाजिक उपक्रम...*
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*२४ नोव्हेंबर १९५६ को सारनाथ मे डॉ.बाबासाहब आंबेडकर ने कहाँ था की, “हर बौध्दो का आद्यकर्तव्य है के वे जानकर समझकर हर रविवार को बुध्द विहार मे जाऐ तथा वहाँ उपदेश ग्रहण करे, वैसे ही प्रत्येक गावमें बुध्द विहार का निर्माण कर वहाँ सभा हेतु सभागृह बनाये.”*

*डॉ. बाबासाहब के आदेश अनुसार बौध्द समाजने देहांतो बस्तियों, गांव, झुग्गी झोपडी एवं शहरो मुहल्ले मे छोटे बडे बुध्द विहार बनाने का प्रयास किया, (जिस जगह पर सामाजिक भवन/सभागृह है उसका उपयोग बुध्द विहार तथा अभ्यासिका के रूप मे इस्तेमाल किये जाने की जरुरत है) परंतू “बुध्द विहार मे हर रविवार को प्रत्येक बौध्द ने अपना अद्यकर्तव्य समझकर विहार मे जाकर वहाँ उपदेश धम्मदेसना ग्रहण करनी चाहीऐ,” ईस आदेश अनुसार डॉ. बाबासाहब को वंदनीय,पुजनीय माननेवाले बौध्द समाजाने दुर्लक्षीत कर आज्ञा की अवहेलना कर रखी है। जिस जगह बुध्द विहार है उस जगह कुछ विशिष्ट लोगों द्वारा विषेश:महीलाये और वृद्ध पुरुषो को विहारो मे देखा जाता है। कहीं जगह केवल पुजा वंदना की जाती है वह भी पुर्णिमा, जयंती, धम्म चक्र प्रवर्तन तथा महापरिनिर्वान दिवस पर प्रासंगिक समय पर ही की जाती है।*

*“हर रविवार को बुध्द विहार मे जा कर उपदेश ग्रहण करे पर ऐसा होता है???”*

*केवल रविवार के अलावा विहारो मे सूबह और शाम मे वंदना होती है अन्य समय मे विहारो मे ताला लगा होता है विषेश: महीलाये और वृद्धो को विहारो मे देखा जाता है। पुरुषों और युवकों विद्यार्थीयो का विहारो मे आना दुर्लभ हुआ है विहार समीती मे बडे पैमाने पर विवाद इन सारी समस्या का समाधान यह संभवनीय है। यह परीस्तीती मे बदलाव लाया जा सकता है और हमने यह प्रयोग को सफलता पूर्वक आजमाया है वह सम्यक सामाजिक कार्य है जिसका नाम है "विहार जहाँ अभ्यासिका वहाँ" बुद्ध काल मे विहार यह अध्ययन अध्यापन ज्ञान का केंद्र हुआ करते थे जिसमें नालंदा,तक्षशीला,वल्लभी,ओदंतपुरी यह विहारे ज्ञान का केंन्द्र थे आज भी हम हमारे विहारो को ज्ञान का केंन्द्र बना सकते है समाज के  विद्यार्थियों द्वारा विहारोमे पढाई कर समाज को परीणामीक स्थीती मे लाया जा सकता है। "पढोंगे तो बचोंगे" (नही तो मर जाओंगे..) डॉ.बाबासहाब द्वार दिया गया संदेश जो आचरन मे लाने हेतु विद्यार्थियों द्वारा COMPUTATIONAL EXAM की पढाई जिसके द्वारा UPSC, MPSC, BANK, REILWAY की परीक्षाये उत्तीर्ण होकर IAS IPS,IRS, बडा ओहदा हासिल कर देहातो, बस्तियों,गांव,झोपडट्टी मे रहने वाले समाज की पहली कोैम मुख्य प्रवाह से जुडेगी अभ्यासीका का मुख्य उद्देश्य यह है की यहाँ आनेवाला व्यक्ति फुले, शाहु, डॉ.अंबेडकर इन महापुरुषों के विचारधारा के अनुकूल व्यक्ति का निर्माण करना है बडे पैमाने पर नवयुवक का संगठन कर सामाजिक सुरक्षा की भावना विकसित करना है। बुध्द विहार यह समाज के हर घटकों को जोडणेवाला महत्वाचा दूवा है इससे समाज मे एक मजबुत संघठन का  निर्माण होणे की प्रक्रिया शुरु होती है। बंधुत्व, मैत्रि के माध्यम से एक दुसरे से समंद प्रस्थापीत होते है जिससे हर एक व्यक्ति मे बंधुता की भावना निर्माण होने मे सहायक होगी, समाजमे, कुटूंबमे धम्ममय वातावरण का निर्माण होगा विहार मे प्रबोधन के कारण धम्म का  ज्ञान मिलेगा जिससे बौद्ध धम्म को  प्रचारक, प्रसारक,अभ्यासक और आचरण करने वाला समाज निर्मीत करने मे मदत हो‍गी। बच्चे, विद्यार्थी-विद्यार्थिनी, युवक-युवतीयो पर धम्म के संस्कार होगे जिससे समाज को धम्म के मार्गा पर चलनेवाला एक आदर्श और जागृत पिढी का निर्माण हो‍ने मे हम सबकी सहायक और ठोस परिणाम कारक भूमीका होगी।*

*"विहार जहाँ अभ्यासिका वहाँ"इस उपक्रम के माध्यम से महाराष्ट्र खास कर विदर्भ के बहुतायत विहारो मे अभ्यासिका सफलता पूर्वक "राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका" के माध्यम से यह सम्यक निस्वार्थ और निशुल्क कार्यक्रम चलाया जा रहा है अमरावती शहर महाराष्ट्र मे सधम्म बौद्ध विहार, प्रशीक बौद्ध विहार बडनेरा, दर्यापुर विहार, नागपुर के बहुतांश विहार और अन्य कई जगह अभ्यासिका नवनिर्माण मे गतीमान है जिसके परिणाम बेहद सकारात्मक और समाज को परीणाम देनेवाले है।*

*निवेदन:-*
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*जिस गाव, शहर, कस्वा, बस्ती, देहातो, शहरो मे विहार है और जिन्हें विहारों को ज्ञान का केंन्द्र बनाकर अपने आनेवाली कौम समाज के सशक्तिकरण हेतु विहार मे अभ्यासिका शुरू करने  हेतु "राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका" के कोअर मंबर, को-आँर्डीनेटर्स से संपर्क करे...*
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*Rastrapita Jyotiba Phule Abhasika.....*
*"A MOVEMENT FOR BUILDING THE SOCIETY"*
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*RISE OF HOPE TO  BUILT NATION ON AMBEDKARITE THOUGHTS...*
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*राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासीका.*
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  राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले
      *अभ्यासीका*

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