मतदान

मताधिकार जिम्मेदारी का निर्वहन
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*सुरेन मेश्राम*
9405975246
*अमरावती*

*भारत के हर नागरिक का कर्तव्य है के वह अपने मताधिकार के पवित्र कर्त्तव्य का समुचित रूप से पालन कर प्रमाणित करे कि हमारा जनतंत्र में पूर्ण आस्था है.*
*हमने अपना कर्तव्य निभाना यह हर व्यक्ति की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है जीन महापुरुषों के त्याग बलीदान समर्पण के कारन आज यह स्तीती आई है ऊनके ऋण का निर्वहन केवल नेतीकता के माध्यम से पुर्ण होगा.*
*पहले रानी के पेट से राजा पैदा होता था,आज का राजा मतपेटी से पैदा होता है  लिहाजा,हमें वक्त की नजाकत को समझकर सबको ईस कर्तव्य के प्रती खुद जागना है और दुसरो को जगाना है बदलाव यह प्रक्रिया है जो धिरे धिरे होती है यही तो परिवर्तन की शुरुवात होती है.*

*संविधान लागू होने के पूर्व भारत में केवल 13 % जनता को मताधिकार प्राप्त था. मतदाता की अर्हता प्राप्त करने की बड़ी बड़ी शर्तें थीं केवल अच्छी सामाजिक और आर्थिक स्थितिवाले नागरिकों को मताधिकार प्रदान किया जाता था विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहां के गरीब अमीर व्यक्ति को वोट का अधिकार हासिल है जबकि कई विकसित देशों में अमीर लोगों को ही मताधिकार का अधिकार मिला है*

*संविधान मे हर व्यक्ति के मताधिकार का मुल्य एक है चाहे राजा हो या गरीब सब को यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद (आर्टिकल) 325 व 326 के अनुसार प्रत्येक वयस्क् नागरिक को,प्राप्त है.*

*हमारे कर्तव्य के प्रति सकारात्मक सोच और व्यवस्था परीवर्तन के प्रति हर व्यक्ति की जिम्मेदारी की भावना के साथ साथ प्रत्यक्ष कृत्य भी जरुरी है.मतदान की व्यवस्था के द्वारा किसी वर्ग या समाज का सदस्य राज्य की संसद या विधानसभा में अपना प्रतिनिधि चुनने या किसी अधिकारी के निर्वाचन में अपनी इच्छा या किसी प्रस्ताव पर अपना निर्णय प्रकट करता है इस दृष्टि से यह व्यवस्था सभी चुनावों तथा सभी संसदीय या प्रत्यक्ष संविधानीक विधिनिर्माण में प्रयुक्त होती है. मताधिकार का प्रयोग करने के लिए अपने कर्तव्य को भी निभाएं और यह पहल स्वयं से करें, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा भारतीय संविधान के तहत प्रत्येक व्यक्ति जिनकी आयु 18 वर्ष हो जाती है उसे मताधिकार का अधिकार मिल जाता है हम जिम्मेदार नागरिक हो जाते है हमे अपने मताधिकार की जिम्मेदारी स्वयं के साथ-साथ अपने साथियों, सगे-संबंधी तथा दोस्तों के प्रोत्साहित कर प्रेरित करना चाहिए यह अधिकार की बदौलत हम भविष्य मे अपने देश मे व्यवस्था परीवर्तन जरुर ला सकते हैं.*

*यह बदलाव की स्थीती किसी पर जोर जबरदस्ती से चाहे शपथ दिला कर आश्वासन पा कर संभव नही चाहे सरकारी स्तर पर शपथ भी दिलाई कि हम, भारत के नागरिक लोकतंत्र में निष्ठा रखते हुए प्रण करते है कि हम अपने देश की लोकतांत्रिक परंपराओं तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों की गरिमा को बनाए रखेंगे और प्रत्येक चुनाव में वोट देंगे और धर्म,वंश,जाति,समुदाय, भाषा और अन्य किसी प्रभाव में आकर वोट नहीं देंगे तात्पर्य "भारत हमारा देश है" ईस प्रतीज्ञा की तरह न होना चाहिए समाजीक व्यवस्था परिवर्तन मे व्यक्तिगत नेतीकता लाना बेहद जरुरी है स्वाभिमानी तथा न बिकने वाला समाज बनकर..*
*हमारे मताधिकार की जिम्मेदारी यह हमारे मुक्तीका  साधन है.*

*डाॅ.बाबासाहेब आंबेडकर कहते है मताधीकार हम पैसे से बेचा तो हमारे समान आत्मघातकी, समाजद्रोही एवं मुर्ख और कोई नही किसी भी परीस्थिती मे हमे मिला हुआ यह अधिकार अनमोल है स्वाभिमान है इसे न बेचे.*

*यह सामुदायिक जिम्मेदारी देश हीत तथा मानवाधिकार के विकास का यह जाहीरनामा उन देशवासियों को समर्पित है जिन्होंने ख़ुद को एक विशाल संविधान दिया है लेकिन उसको सम्भालने की योग्यता निर्माण कर हम नकारात्मक अवधारणा को बदल  सकते है अपने जिम्मेदारी का निर्वहन कर.*
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*(((RJPA)))*
*राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासीका*
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